Tuesday, January 8, 2008

मिलेगा ऐसा कोई कभी?

डॉ गरिमा तिवारी जिनसे परिचय तो हुआ था हिन्दयुग्म की प्रतियोगिता जीतने के बाद मेडिटेशन सीखने के दौरान ।लेकिन कब धीरे-धीरे उसने अपने लिये दिल में जगह बना ली कि पता ही नहीं चला । वो "मै और कुछ नही…" और "जीवन ऊर्जा" नाम से ब्लॉग लिखती है। उसकी इच्छा थी कि यह पोस्ट हम अपने ब्लॉग पर दें तो उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए हम उसकी पोस्ट यहां डाल रहे हैं------



मिलेगा ऐसा कोई कभी?

कुछ दिनो पहले एक सहेली का रिश्ता आया था, उसे लोग देखने आये तो वो मुझे भी अपने साथ होने को बोली.... ऐसे माहौल पर मै हमेशा से जाने से कतराती हूँ, पर कोटा की एकमात्र हम उम्र महिला सहेली ने निवेदन किया तो टाला भी नही जा सकता था... उस दिन मै पुरे दिन उसके साथ रही... यहाँ तक की ब्युटीपार्लर तक जाना पड़ा साथ साथ (सबसे खतरनाक जगह), खैर मै उसका बनना सवरना देख रही थी, बीच बीच मे आँटी जी( उसकी मम्मी) नसीहते देना भी सुन रही थी, देख बेटी, सबके सामने आँखे झुका के बाते करना, जो कोई कुछ पुछे आराम से जवाब देना, तु कुछ मत पुछना.... वगैरह वगैरह... तभी अंकल जी ने कहा... और अपने लड़को जैसे दोस्तो को सामने मत लाना... और अपनी बहादूरी का बखान मत करना... सभ्य शालीन बनकर सामने आना... वगैरह वगैरह।

अब ये सारी बाते उबकाई लाने के लिये बहुत लग रही थी... मै वहाँ से खिसकने के बहाने बना रही थी... लेकिन सहेली जी हैं कि बस... अंत तक उसे मेरी हालत पर तरस आ गया और मुझे निकलने की इजाजत दे दी एक शर्त के साथ की मै उसके दुसरे सहेली को साथ लेकर दुबारा 4 बजे आऊँगी... मुझे क्या चाहिये था.. खिसकने का बहाना... लेकिन ये क्या दुबारा आना... खैर मैने हाँ बोला और साँस लेने निकल पड़ी।

मै सोच रही थी कि कोई बहाना कर लूँ, पर वक्त पर उसकी सहेली आ गयी, और मरती क्या ना करती कबुतरखाने मे मुझे जाना ही पड़ा... वहाँ पहूँचे तो सब तैयार था... मेरी सहेली ने देखती ही इशारा किया (लेट क्यूँ किया?) वैसे जवाब वो जानती थी, मुझे कुछ कहना नही पड़ा... वैसे भी शायद मै बोल नही पाती..उन लोगो की बाते हो रही थी... बाते क्या सिर्फ सवाल... और सहेली कुछ सीमित शब्दो मे जवाब दिये जा रही थी। मै सोच रही थी मेरी शेरनी को क्या हुआ??? मेरी जिन्दगी मे यह पहला अनुभव इस तरह का.... वैसे टी वी सीरीयल मे कभी कभार देखा है या किसी से सुना है पर आँखो देखा अजीब लग रहा था...।

भईया मेरी स्थिती को भाँप गये (सहेली के बड़े भाई), और मेरे लिये स्थिती सामान्य करने के लहजे से बोल पड़े, डॉ साहिबा जरा औरा रीडींग कर दिजिये... थोड़ा आपका मुड भी हल्का हो जायेगा, और हमे कुछ जानकारी भी मिल जायेगी.... हुह! तब से चुप बैठी थी... थैंक्स भईया बोल के एक एक की रीडींग शुरू.... लगभग सभी लोग संतुष्ट थे... तभी किसी ने पुछा.. क्यूँ बेटा तुम्हे शादी नही करनी? मैने सोचा अपना वही प्यारा सा जवाब दे दूँ "नही" ... पर मै बोली... करनी तो है.. परआँटी जी बोले कि मेरी नजर मे एक लड़का है कहो तो तुम्हारे मम्मी से बात करूँ?मैने कहा शौक से... पर मेरी कुछ शर्ते हैं, लड़का इन शर्तो पर खरा उतरता हो तो... और मेरे शर्तो कि श्रृँखला शुरू हुई---

1.लड़का बहुत लम्बा ना हो, ना ज्यादा छोटा हो... मतलब मेरे जैसा
2. मेरा हम उम्र हो
3. गुस्से वाला ना हो
4. उसे खाना बनाने आता हो
5. मेरा ऑफिस जान उसे नागवार ना हो
6. घर सम्भालने की जिम्मेदारी उसकी
7. मै कभी देर से घर वापस आऊँ तो कोई सवाल ना पुछे
8. मेरी प्राइवेसी मे ताका-झाँकी ना करे
9. मुझसे, कभी, क्यूँ इत्यादि सवाल ना करे
10. मै थकी रहूँ तो पैर भी दबाये
11. मतलब कि एक आदर्श गृहणी आजतक जो जो करती आयी है, लगभग सारे काम वो करेगा....
12. रोज रोज मेरे लिये बाजार से चॉकलेट लाये... हाँ मै चॉकलेट मे मामले मे इमानदार हूँ, वो मिल बाँट के खा लेंगे।
13. और इन सारे शर्तो मे मै अपने हिसाब से कभी भे घट बढ़ा सकती हूँ।
14. वो कभी कोई शर्त मेरे सामने ना रखे.............

अब ये सारे शर्त कोई लड़का पूरा कर सके तो जरूर बताना.... वरना जरूरत नही है। इतना कहना था कि सब ठहाके लगाकर हँस पड़े और एकमत स्वर मे बोले, ऐसा लड़का मिलना मुश्किल ही नही नामुमकिन है.....
तो बताईये है क्या कोई ऐसा......?

डॉ गरिमा तिवारी, कोटा, राजस्थान

9 comments:

सागर नाहर said...

अनुराधाजी
ये लड़की सोचती है अपने ब्लॉग पर ना लिख कर आपके ब्लॉग पर लिखेगी तो मुझे पता नहीं चलेगा, एक ना एक दिन ये मेरे हाथों पिटेगी, आप छुड़वाना मत में कहे देता हूँ।
बड़ी ही शरारती लड़की है ये गरिमा।
:)

Gyandutt Pandey said...

बड़ा अच्छा लगा यह रोल रिवर्सल पढ़ने पर। आज यह नामुमकिन लगता हो - पर जल्दी ही यह वास्तविकता बनने लगेगा। अर्थशास्त्र सम्बन्धों की नयी व्याख्या बनायेगा।

मीनाक्षी said...

ha ha...i love this girl...sure she will find her choice one day... ... god bless her.

Sanjeet Tripathi said...

लो कल्लो बात!
मिलेगा जी मिलेगा, दुनिया में मामू कम नई हैं कोई न कोई मिल ही जाएगा!! ;)

आशीष महर्षि said...

खाना बनाना तो नहीं आता है, खैर खुदा करे उन्‍हें उनकी पंसद का लड़का मिल जाए और इसी जन्‍म में

कमल शर्मा said...

एक ढूंढो, हजार मिलेंगे ऐसे लड़के। कोटा में ही मिल जाएंगे गरिमा के लिए कई ऐसे लड़के।

sushma said...

Sushma


Antarman ka khulasa koi badur ladki hi kar sakti hai aur mai use achchi tarah janti hun
wo ladki wakai dil me jagah bana leti hai aur phir janm bhar ke liye apni ban jati hai.
bahut man karta hai use dekhane ka par mai dil me jo uski emage hai use badlana nahi chahti

कंचन सिंह चौहान said...

ohhhh ho Garima chat karte karte achanak kho gai...balki mai hi 6 months ki beemari me kho gai....pl garima ke blog ka link dijiyega..! thanks

anitakumar said...

इसमें से कई शर्ते तो लड़के आज कल अम्ल में ला रहे हैं ।टोटल दादागिरी है जी , जैसे लड़के को कोई हक नहीं कि वो कोई शर्त रखे,